Woe-d to Waterlogging

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Gurgaon, India – June 28: City witness rain water logging in the city, in Gurgaon, India, on Tuesday, June 28, 2016. Photo by Manoj Kumar

दो बूँद बरसी बारिश,
रुक गया राजधानी क्षेत्र.
सड़कें बन गयीं नदी
गड्ढे बन गए लेक!
कुछ बूंदों ने डुबो दिया
रुकवा दिया ट्रैफिक
दर्जन भर और गिरीं
तो डूबा डूबा सा ट्रैफिक!

उमड़ पड़ते हैं नाले, नदियों की तरह
मंद चलता है यातायात
प्रगति की तरह

अंतरिक्ष तक जा पहुंचे
युद्ध में हैं उत्तम.
मेक इन इंडिया का लक्ष्य है
स्वच्छ भारत का स्वप्न
जाने क्यों आज तक
यह ड्रेनेज न सुधार पाए हम!

जीवन देय बृष्टि
करे समय से आगमन
नगरपालिका फिर भूल गयी
जो उसका था कार्यक्रम.
मेहनत कर के , कर दिया है,
कुछ तो नाले बनवा देते
डाउन थे ड्रेन तो गया ही है
साथ कुछ पानी भी बहा देते

एक देश की राजधानी है
एक कहलाये मिलेनियम सिटी
दोनों की हालत झेल के
आँखें शर्म से झुकीं

मुख्य मंत्री दोनों के
बच्चों की तरह लड़ें
असल समस्या क्या है
शायद दोनों की समझ से परे

पानी वैसे काफी था
अगर कोई चाहे डूब के मरना
नगर पालिका, बाबू लोग
या जिनको जिताया हमने इलेक्शन.

(This was written while stuck in  crawling traffic last week and finished post the debacle on Thursday, 28th July 2016.It is relevant on most rainy days.Pain and suffering articulated to the best of my ability.)

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